
रूपेश कुमार सिंह
पटना, बिहार
आज पुलिस की हकीकत:
– इतिहास: हां सर, पुलिस एक्ट 1861 अंग्रेजों ने “दमन और नियंत्रण” के लिए बनाया था। आज भी वही ढांचा चल रहा है।
– ड्यूटी टाइम: कोई फिक्स समय-सारणी नहीं है। 8-8 घंटे की 3 शिफ्ट तो कागज पर है, पर हकीकत में 12-14-16 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। छुट्टी के नाम पर भी कुछ नहीं।
– सुविधा का अभाव: SI के नीचे कुर्सी तक नहीं होती। थाने में बैठने की जगह, पीने का पानी, टॉयलेट तक ठीक नहीं।
– वर्दी: 45 डिग्री की गर्मी में मोटी खाकी वर्दी + बेल्ट + बूट। हीट स्ट्रोक आम बात है, पर सरकार को दिखता ही नहीं।
– दबाव: ऊपर से राजनेताओं और अफसरों का दबाव, नीचे से जनता की उम्मीद। बीच में फंसता है सिपाही।
सबसे बड़ी विडंबना:
जो लोग 24×7 हमारी रक्षा करते हैं, उनकी खुद की कोई सुरक्षा नहीं। न समय की, न सुविधा की, न सम्मान की।
“सच की आवाज जनता की वाणी चौथी वाणी”